समाज में रहकर भी उनसे दूर रहना ही उनकी किस्मत है, जो रिश्तों की किसी गिनती में नहीं आते और आज भी उनकी स्वीकार्यता पर पुरजोर बहस छिड़ी है। खुशी के दिनों में दरवाजे पर जो हाथ बधाई बजाते थे, नाच- गाकर...from Live Hindustan Rss feed https://ift.tt/343mTJp
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