सभी भाषाओं से प्रेम करना चाहिए। भाषा थोपने की चीज नहीं है। लेकिन अपनी मातृभाषा से तो प्रेम होना ही चाहिए। क्योंकि मातृ भाषा में अभिव्यक्ति का अपना अलग आनंद है। इसे कभी नहीं छोड़ना चाहिए। यह बात डीएम...from Live Hindustan Rss feed https://ift.tt/2YkKwui
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