छठ गीत सुनकर छठ का अहसास होने लगा है। शहर में छठ की तैयरियां शुरू हो गई हैं। प्रकृति का यह पर्व हमें सामूहिकता का पाठ भी पढ़ता है। इसमें न वैदिक मंत्रोच्चार की अनिवार्य होती है न जाति-धर्म का बंधन।...from Live Hindustan Rss feed https://ift.tt/2pIorII
No comments:
Post a Comment