बापू सभागार का ऑडिटोरियम खचाखच भरा था। उम्र भर मर-मर के हम जी लिये, एक पल तो अब हमें जीने दो...गीत बज रहा था। मस्ती का माहौल था पर हर किसी की निगाहें बस मंच पर थी। इंतजार तो बस उस लेखक, उस रोल मॉडल...from Live Hindustan Rss feed https://ift.tt/2l9hzlF
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