लोकतंत्र के महापर्व का रंग कुछ वोटरों के लिए कैसे फीका होता है इसका जीता जागता उदाहरण रधिया देवी है, जिस जोश और जज्बे के साथ 90 साल के उम्र में लाठी और परिजनों के सहारे अपने बूथ तक पहुंची रधिया को उस...from Live Hindustan Rss feed http://bit.ly/2ZwuaPu
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