शहरों की बढ़ रही आबादी और बढ़ते औद्योगिकीकरण की चपेट में जीवनदायिनी कही जानेवाली मां गंगा आ चुकी हैं। आलम यह है कि गंगा का पानी न तो आचमन करने लायक रह गया है और न ही नहाने लायक। गंगा का पानी अब तो...from Live Hindustan Rss feed http://bit.ly/2DseBiM
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