जो भेद मोटे-मोटे ग्रंथ तथा समाजवादी विचारधाराएं और सामाजिक क्रांतियां नहीं मिटा सकीं, वह छठ पर्व पर स्वत: मिट जाता है। चार दिनों के लिए पूरा समाज इस तरह घुला-मिला दिखाई पड़ता है, मानों लोगों के बीच...from Live Hindustan Rss feed https://ift.tt/2PmMrNx
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