
इस गिरावट से जहां निर्यातकों की चांदी है वहीं आयातकों की सांसत है। बड़ी दिक्कत चालू खाते के घाटे के स्तर पर होने वाली है और स्पष्टतः वह बढ़ेगा। जब तेल आयात महंगा होगा तो घरेलू बाजार में तेल के पहले से बढ़े हुए दाम और भी बढ़ेंगे। जब तेल के दाम बढ़ेंगे तो फल-सब्जी और खाने-पीने की चीजों के दामों का बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे सामान जो आयातित उपकरणों से बनते हैं जैसे कि कार, कम्यूटर, स्मार्टफोन वे सब महंगे हो जाएंगे।
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